चांदनी के पार रिव्यू: नदी किनारे के कस्बे की शांत कहानी, जो आख़िर में रुला देती है
निर्देशक मेघना भोसले की दूसरी फ़िल्म एक मल्लाह और उससे दूर हो चुकी बेटी के एक मानसून की कहानी है। दमदार अभिनय और धैर्य से कही गई कहानी, बीच का धीमा हिस्सा थोड़ा खलता है।
चांदनी के पार सुबह की एक नाव यात्रा से शुरू होती है: लकड़ी की नाव, थका हुआ इंजन और मल्लाह भोला (राघव कपूर), जो नदी की हर धारा जानता है, लेकिन अपनी बेटी से बात करना नहीं जानता। अगले दो घंटों में निर्देशक मेघना भोसले इस चुप्पी को धीरे-धीरे टूटने देती हैं।
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