बेंगलुरु के एक स्टार्टअप का बनाया एआई कीबोर्ड 'बोली' अब 14 भारतीय भाषाओं में काम करता है। यह कीबोर्ड बोले गए शब्दों को लिखे हुए शब्दों में बदलता है और कंपनी का दावा है कि यह क्षेत्रीय उच्चारण और बोलियों को भी अच्छी तरह समझता है।
कंपनी की संस्थापक मीनाक्षी सुब्रमण्यम ने बताया कि कीबोर्ड को अलग-अलग इलाक़ों के हज़ारों लोगों की आवाज़ों पर प्रशिक्षित किया गया है, जिन्होंने अपनी सहमति से रिकॉर्डिंग दी। "एक ही हिंदी शब्द को भोजपुरी बोलने वाला और राजस्थानी बोलने वाला अलग तरह बोलता है। कीबोर्ड को दोनों समझने चाहिए।"
कीबोर्ड की ख़ास बातें
- आवाज़ की प्रोसेसिंग फ़ोन पर ही होती है; कंपनी के मुताबिक़ रिकॉर्डिंग सर्वर पर नहीं भेजी जाती।
- बोलते-बोलते भाषा बदलने पर भी, जैसे हिंदी में अंग्रेज़ी के शब्द, सही लिखाई।
- कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए लिखे संदेश को पढ़कर सुनाने की सुविधा।
- बिना इंटरनेट के भी बुनियादी काम।
तकनीक के जानकारों का कहना है कि भारतीय भाषाओं में आवाज़ से लिखने की सुविधा उन लाखों लोगों के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है, जिन्हें टाइप करना मुश्किल लगता है। लेकिन वे यह भी कहते हैं कि उपयोगकर्ताओं को ऐप की अनुमतियां और निजता नीति ध्यान से पढ़नी चाहिए।
कंपनी ने बताया कि कीबोर्ड मुफ़्त है और कमाई कंपनियों को ग्राहक सेवा के लिए यही तकनीक देने से होती है। अगले साल तक 22 भाषाओं तक पहुंचने का लक्ष्य है।









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