किसानों के लिए बनाए गए एक हिंदी वॉइस असिस्टेंट के यूज़र 10 लाख के पार पहुंच गए हैं। इसे बनाने वाले बेंगलुरु के स्टार्टअप बोली लैब्स ने बुधवार को यह जानकारी दी। मुफ़्त ऐप को लॉन्च हुए 18 महीने हुए हैं।
किसान एक बटन दबाकर वैसे ही सवाल पूछते हैं जैसे पड़ोसी से पूछते: पास की मंडी में टमाटर किस भाव बिक रहा है, मिर्च के पत्ते क्यों मुड़ रहे हैं, या हफ़्ते के आख़िर से पहले बारिश होगी या नहीं। ऐप कुछ वाक्यों में हिंदी में बोलकर जवाब देता है।
सह-संस्थापक प्रिया राघवन ने कहा, "हमारे ज़्यादातर यूज़र्स ने ज़िंदगी में कभी कुछ टाइप करके नहीं खोजा। लेकिन बोल हर कोई सकता है। हमने पूरा प्रोडक्ट इसी एक बात को ध्यान में रखकर बनाया।"
यह कैसे काम करता है
- बोलकर सवाल, बोलकर जवाब। ऐप हिंदी के कई लहजे और खेती से जुड़े स्थानीय शब्द समझता है।
- स्थानीय जानकारी। भाव पास की नियमित मंडियों से और मौसम किसान के ब्लॉक के सार्वजनिक पूर्वानुमान से लिया जाता है।
- जांची हुई सलाह। कीटनाशक और बीमारियों से जुड़े जवाब कृषि विशेषज्ञों की टीम की जांची लाइब्रेरी से आते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर ऐप किसान को स्थानीय कृषि अधिकारी से मिलने की सलाह देता है।
आंकड़े
कंपनी का कहना है कि अब रोज़ क़रीब 40,000 सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं, जिनमें से दो-तिहाई भाव और मौसम को लेकर होते हैं। इस साल की शुरुआत में कंपनी ने निवेशकों से 32 करोड़ रुपये जुटाए थे और उसके 60 कर्मचारी हैं, जिनमें से एक-तिहाई गांवों में काम करते हैं।
स्वतंत्र शोधकर्ता कहते हैं कि ऐसे टूल मददगार हैं, लेकिन इन पर पूरी तरह निर्भर होना ठीक नहीं। एक कृषि विश्वविद्यालय में ग्रामीण तकनीक पर शोध करने वाले डॉ. मोहन काले ने कहा, "वॉइस ऐप अच्छी शुरुआत है, लेकिन यह उस कृषि कर्मचारी की जगह नहीं ले सकता जो खेत में आकर फ़सल देख सके।"
बोली लैब्स अगले साल मराठी और भोजपुरी जोड़ने की योजना बना रही है। साथ ही एक ऐसा फ़ीचर भी आएगा जिससे किसान सवाल के साथ ख़राब पत्ते की फ़ोटो भी भेज सकेंगे।








टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ