नभयान एयरोस्पेस के परीक्षण स्टैंड पर तीन कैमरों से फ़िल्माया गया यह वीडियो कंपनी के चकोर-1 इंजन के पूरे 120 सेकंड के परीक्षण को दिखाता है। यह इंजन तरल मीथेन और तरल ऑक्सीजन से चलता है।
इंजन चालू होने के पल पर ध्यान दें, जब पूरी ताक़त पर पहुंचते ही लौ नारंगी से लगभग पारदर्शी नीली हो जाती है। मीथेन साफ़ जलता है, इसलिए पुराने केरोसिन इंजनों की तुलना में धुआं बहुत कम दिखता है।
करीब एक मिनट पर स्टैंड के किनारे वाला कैमरा ईंधन की पाइपों पर जमती बर्फ़ दिखाता है, जो इंजन में जा रहे बेहद ठंडे तरल पदार्थों का संकेत है। 120 सेकंड पर इंजन का बंद होना पहले से तय था, और कंट्रोल रूम में इंजीनियरों की उलटी गिनती सुनाई देती है।
मुख्य इंजीनियर डॉ. किरण रेड्डी ने कहा, "साफ़ तरीक़े से बंद होना उतना ही ज़रूरी है जितना साफ़ शुरुआत। इससे पता चलता है कि वाल्व और सॉफ़्टवेयर ने ठीक वही किया जो हमने कहा था।"
कंपनी अब लंबे और बार-बार होने वाले परीक्षणों की योजना बना रही है, ताकि पता चले कि इंजन दोबारा इस्तेमाल में कितना टिकता है। परीक्षण और कंपनी की प्रक्षेपण योजनाओं के बारे में और पढ़ें।







