केसरगंज का पहला इलेक्ट्रिक बस डिपो शुक्रवार को शुरू हो गया। यहां 60 बसें, 30 फ़ास्ट चार्जर और छत पर एक सोलर प्लांट है, जिससे अधिकारियों के मुताबिक़ दिन में डिपो की लगभग पांचवें हिस्से की बिजली की ज़रूरत पूरी होगी।
अगले महीने के पहले हफ़्ते से बसें शहर के चार और दो अंतर-शहर रूटों पर चलने लगेंगी। सबसे व्यस्त रूट, यानी रेलवे स्टेशन से विश्वविद्यालय तक, सुबह और शाम के व्यस्त समय में हर आठ मिनट में बस मिलेगी। अभी इस रूट पर लगभग 20 मिनट इंतज़ार करना पड़ता है।
डिपो प्रबंधक संजय त्रिपाठी ने कहा, "पुरानी डीज़ल बसें थक चुकी थीं और बहुत शोर करती थीं। ये बसें शांत हैं, चलाने में सस्ती हैं और इनका फ़र्श नीचा है, इसलिए बुज़ुर्ग और व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वाले आसानी से चढ़ सकते हैं।"
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा
- पहले साल किराया मौजूदा सिटी बसों जितना ही रहेगा।
- हर बस में जीपीएस होगा और 40 स्टॉप पर बस आने का समय डिस्प्ले पर दिखेगा।
- आगे की सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित और बसों में सीसीटीवी कैमरे।
- छात्रों के लिए आधे दाम पर मासिक पास, जो सभी छह रूटों पर चलेगा।
ड्राइवरों और कंडक्टरों ने नई बसों पर दो महीने की ट्रेनिंग ली है, जिसमें बारिश में बैटरी को सुरक्षित रखते हुए गाड़ी चलाना भी शामिल है। 30 ड्राइवर पहले डीज़ल बसें चलाते थे, और 12 महिलाएं पिछली भर्ती में चुनी गई हैं।
डिपो एक पुरानी वर्कशॉप की ज़मीन पर बना है। आसपास की गलियों के लोगों ने सड़क चौड़ी करने के लिए चारदीवारी पीछे करने की मांग की थी, जिसे मानते हुए परिवहन विभाग ने तीन मीटर ज़मीन छोड़ दी है।






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