भैरोंपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय की एक कक्षा अब बाक़ी कक्षाओं से अलग दिखती है। दीवार पर सफ़ेद स्क्रीन है, छत पर प्रोजेक्टर, और कोने में एक छोटी अलमारी में स्पीकर व सौर ऊर्जा की बैटरी रखी है। यह स्मार्ट क्लास स्कूल के पुराने छात्रों ने अपने पैसों से बनवाई है।
1990 के दशक में यहां पढ़ चुके करीब 70 पूर्व छात्रों ने एक व्हाट्सऐप समूह के ज़रिए छह महीने में चंदा जुटाया। इनमें से कई अब दूसरे शहरों में शिक्षक, इंजीनियर और दुकानदार हैं।
पूर्व छात्र और अब एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाने वाले अनिल वर्मा ने बताया, "हम जब यहां पढ़ते थे तो एक ब्लैकबोर्ड और चॉक ही सब कुछ था। हम चाहते थे कि बच्चे वो सब देख सकें जो हमने सिर्फ़ किताबों में पढ़ा।"
कक्षा में क्या बदला
प्रधानाध्यापक सुरेंद्र यादव के मुताबिक़ शिक्षक अब विज्ञान के प्रयोग, नक्शे और कहानियां वीडियो के ज़रिए दिखाते हैं। हर कक्षा को हफ़्ते में कम से कम तीन पीरियड स्मार्ट क्लास में मिलते हैं।
- पिछले तीन महीनों में औसत हाज़िरी 71 से बढ़कर 84 प्रतिशत हुई।
- बिजली कटौती में भी कक्षा सौर बैटरी से चलती है।
- शनिवार को बच्चों के लिए शैक्षिक फ़िल्म का एक पीरियड रखा गया है।
स्कूल प्रबंधन समिति ने तय किया है कि उपकरणों की देखरेख के लिए हर महीने एक छोटी रक़म अलग रखी जाएगी। पूर्व छात्रों का समूह अब स्कूल के पुस्तकालय के लिए किताबें जुटाने की योजना बना रहा है।












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