अमरपुर गांव के सरकारी स्कूल का मैदान सुबह छह बजे से ही हॉकी स्टिक की आवाज़ों से गूंजने लगता है। यहां चलने वाली एक छोटी हॉकी अकादमी की 14 लड़कियों को इस बार राज्य टीम के ट्रायल के लिए चुना गया है।
अकादमी की शुरुआत आठ साल पहले पूर्व राज्य स्तरीय खिलाड़ी रामकिशोर यादव ने की थी। उन्होंने अपनी पुरानी स्टिक और कुछ गेंदों के साथ गांव के बच्चों को सिखाना शुरू किया। आज यहां 120 बच्चे रोज़ अभ्यास करते हैं, जिनमें आधे से ज़्यादा लड़कियां हैं।
रामकिशोर ने कहा, "शुरुआत में माता-पिता को डर था कि लड़कियां खेलेंगी तो पढ़ाई छूट जाएगी। अब वही माता-पिता सुबह ख़ुद उन्हें मैदान छोड़ने आते हैं।"
अकादमी की ख़ास बातें
- अभ्यास सुबह और शाम, ताकि स्कूल का समय न टकराए।
- पुराने खिलाड़ियों और गांव वालों के चंदे से स्टिक, जूते और गेंदें।
- हर शनिवार पढ़ाई का एक घंटा, जिसमें बड़े बच्चे छोटों की मदद करते हैं।
- खिलाड़ियों के लिए हफ़्ते में तीन दिन दूध और चने का इंतज़ाम।
ट्रायल के लिए चुनी गई 16 साल की पूजा कुमारी ने बताया कि उसके पिता खेतिहर मज़दूर हैं। "पहली बार अपनी स्टिक मिली थी तो रात भर उसे पास रखकर सोई थी।"
अकादमी की सबसे बड़ी ज़रूरत एक घास वाला समतल मैदान है। ग्राम पंचायत ने स्कूल के पास की ज़मीन को समतल कराने का प्रस्ताव ब्लॉक को भेजा है।








टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ