लेकव्यू के टाउन हॉल में शनिवार शाम पुरानी फ़िल्मों के गीतों की धुनें गूंजीं। शहर के एक पुराने ऑर्केस्ट्रा परिवार की तीसरी पीढ़ी ने 1950 और 60 के दशक के 24 गीत पेश किए, और हॉल की हर सीट भरी रही।
इस ऑर्केस्ट्रा की शुरुआत 70 साल पहले मास्टर दीनानाथ ने की थी, जो शादियों और मेलों में फ़िल्मी गीत बजाते थे। आज उनके पोते-पोतियां वायलिन, सैक्सोफ़ोन, तबला और हारमोनियम के साथ वही परंपरा निभा रहे हैं।
कार्यक्रम के संचालक और मास्टर दीनानाथ के पोते आशीष ने कहा, "दादाजी कहते थे कि गाना वही अच्छा, जिसे सुनकर आदमी गुनगुनाता हुआ घर जाए। आज लोग गाते हुए बाहर निकले, यही हमारा इनाम है।"
शाम की ख़ास बातें
- 1950 और 60 के दशक की फ़िल्मों के 24 गीत, जिनमें कई अब कम सुनाई देते हैं।
- पुराने वाद्यों के साथ लाइव ऑर्केस्ट्रा, बिना किसी रिकॉर्डेड ट्रैक के।
- हर गीत से पहले उससे जुड़ा एक छोटा क़िस्सा।
- आख़िर में दर्शकों के साथ मिलकर गाया गया एक गीत।
दर्शकों में बड़ी संख्या बुज़ुर्गों की थी, लेकिन कई युवा भी अपने माता-पिता के साथ आए थे। कॉलेज की छात्रा तनिष्का ने कहा कि उसने ये गीत पहली बार लाइव सुने। "दादी हर गीत के साथ गा रही थीं। मुझे लगा जैसे उनकी जवानी देख रही हूं।"
टिकट दो दिन में बिक जाने के बाद आयोजकों ने अगले महीने एक और शो की घोषणा की है।






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