अमरौली के ऐतिहासिक दशहरा मेले की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। हर साल यहां तीन दिनों में लाखों लोग पहुंचते हैं। इस बार ज़िला प्रशासन ने भीड़ को संभालने के लिए एक नई योजना बनाई है, जिसमें पैदल चलने वालों के लिए एकतरफ़ा रास्ते और ड्रोन से निगरानी शामिल है।
अपर ज़िलाधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि मेला मैदान में घुसने और निकलने के रास्ते अलग-अलग होंगे। "पिछले साल सबसे ज़्यादा परेशानी वहां हुई जहां आने और जाने वाले आमने-सामने टकरा रहे थे। इस बार हर रास्ता एक ही दिशा में चलेगा।"
क्या-क्या इंतज़ाम
- मैदान के चारों कोनों पर खोया-पाया केंद्र, जहां बच्चों के लिए अलग कमरा होगा।
- दो ड्रोन और 40 सीसीटीवी कैमरों से भीड़ की निगरानी।
- मैदान से एक किलोमीटर दूर तीन पार्किंग स्थल और वहां से ई-रिक्शा सेवा।
- पांच प्राथमिक उपचार केंद्र और दो एंबुलेंस हर समय तैनात।
- रावण दहन के समय मंच के आसपास 50 मीटर का घेरा, जहां किसी को जाने की अनुमति नहीं होगी।
मेला समिति के अध्यक्ष हरिओम गुप्ता ने कहा कि इस साल रामलीला मंचन का 75वां वर्ष है, इसलिए भीड़ पिछले साल से ज़्यादा रहने की उम्मीद है। समिति ने स्वयंसेवकों के लिए पीली जैकेट और सीटी का इंतज़ाम किया है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बच्चों की जेब में घर का फ़ोन नंबर लिखी पर्ची रखें, अफ़वाहों पर ध्यान न दें और किसी भी परेशानी में नज़दीकी पुलिस सहायता केंद्र से संपर्क करें।














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