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समझिए: मानसून की वापसी का आने वाले हफ़्तों के लिए क्या मतलब है

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी एक दिन में नहीं, धीरे-धीरे होती है। जानिए मौसम विशेषज्ञ कैसे तय करते हैं कि वापसी शुरू हो गई और इसका खेती, शहरों व हवा पर क्या असर होता है।

शहर की इमारतों और छातों पर तेज़ बारिश का चित्रण
फ़ोटो: चित्रण: Shirepost समाचार (सिंथेटिक)

दक्षिण-पश्चिम मानसून हर साल कई चरणों में आता है और उसी तरह लौटता भी है। मौसम के आख़िर में विशेषज्ञ एक "वापसी रेखा" पर नज़र रखते हैं, जो कई हफ़्तों में देश के उत्तर-पश्चिम से दक्षिण और पूर्व की ओर बढ़ती है।

किसी इलाक़े में कई दिनों तक बारिश न होना, निचले वायुमंडल में हवा का सूखा होना और ऊंचे दबाव के कारण हवाओं की दिशा बदलना, ये सभी संकेत एक साथ दिखने पर ही उस इलाक़े को मानसून से मुक्त घोषित किया जाता है।

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