चार मिनट के इस वीडियो में हम मारावेल के गोताखोरों की एक टीम के साथ चलते हैं, जो सालों के लंगर डालने और ज़रूरत से ज़्यादा मछली पकड़ने से क्षतिग्रस्त भित्ति पर प्रवाल फिर से लगा रही है।
काम पानी के नीचे बनी एक नर्सरी से शुरू होता है, जहां प्रवाल के छोटे टुकड़े धातु के फ्रेम से कपड़ों की तरह लटके रहते हैं। कुछ महीनों में जब टुकड़े बड़े हो जाते हैं, तो गोताखोर उन्हें टोकरियों में भित्ति तक ले जाते हैं और समुद्र के लिए सुरक्षित एक लेप से उन्हें जगह पर जमा देते हैं।
कई गोताखोर पूर्व मछुआरे हैं, जो कभी इन्हीं पानियों में मछली पकड़ते थे। वीडियो में गोताखोर तोमास रुएल कहते हैं, "मेरे पिता यहां मछली पकड़ते थे, और उनके पिता भी। अब मैं लेने के बजाय लगाता हूं। मछलियां लौट रही हैं, और पर्यटक भी।"
परियोजना पर नज़र रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक़ संरक्षित भित्तियों पर जीवित प्रवाल का हिस्सा पांच साल में करीब 18 से बढ़कर 27 प्रतिशत हुआ है, हालांकि गर्म होता समुद्र अब भी गंभीर ख़तरा है।
पूरी कहानी और आगे की योजना के लिए भित्ति के सुधार पर हमारी रिपोर्ट पढ़ें।







