मुख्य सामग्री पर जाएँ

खोजें

ख़बरें खोजने के लिए कोई शब्द या नाम लिखें।

विकसित होती ख़बर

खेरालिया में ग्रामीणों ने 200 साल पुरानी बावड़ी को संवारा, लौट आया पानी

जोधपुर के पास की बावड़ी से छह महीने के श्रमदान में गाद और कचरा निकाला गया। इस बार बारिश के बाद दशकों में पहली बार 14 सीढ़ियों तक पानी भरा।

जलाशय और पानी की बूंद का चित्रण
फ़ोटो: चित्रण: Shirepost समाचार (सिंथेटिक)

मुख्य बातें

  • क्या हुआ और यह क्यों अहम है।
  • सबसे पहले कौन प्रभावित होगा।
  • आगे किस पर नज़र रखें।

पिछले क़रीब 40 सालों से जोधपुर से एक घंटे की दूरी पर बसे खेरालिया गांव की बावड़ी कूड़ेदान बनी हुई थी। इस मानसून में, गांव के कई लोगों की याद में पहली बार, उसमें 14 सीढ़ियों तक पानी भरा।

यह बदलाव छह महीने के श्रमदान से आया। ग्रामीणों, छात्रों और कुछ कारीगरों ने टनों गाद, प्लास्टिक और टूटे पत्थर निकाले, बारिश का पानी बावड़ी तक लाने वाली नालियों की मरम्मत की और ढही हुई एक दीवार को चूने के गारे से फिर बनाया।

आपकी पहुंच जांची जा रही है…

सदस्य

स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दें

हमारी रिपोर्टिंग आप जैसे पाठकों के सहयोग से चलती है। बिना सीमा पढ़ने और इसे जारी रखने के लिए सदस्य बनें।

विषय

इस ख़बर में

टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ

हमारा न्यूज़लेटर पाएं

आपके समय के लायक़ ख़बरें, आपके इनबॉक्स में। मुफ़्त, और एक क्लिक में छोड़ सकते हैं।

अपने न्यूज़लेटर चुनें

हम आपका ईमेल सिर्फ़ आपके चुने न्यूज़लेटर के लिए इस्तेमाल करते हैं।