धनपुरा दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति का रोज़ का दूध संग्रह दो साल में दोगुना होकर करीब 18,000 लीटर हो गया है। समिति ने 24 गांवों के संग्रह केंद्रों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले चिलर लगाए हैं।
चिलर लगने से पहले सुबह इकट्ठा हुआ दूध गर्मी में घंटों ट्रक का इंतज़ार करता था और उसका कुछ हिस्सा फट जाता था। कम गुणवत्ता वाले दूध का दाम कम मिलता था या वह लौटा दिया जाता था।
समिति के अध्यक्ष सुरेश मोदी, जो 30 साल से धनपुरा में पशुपालन कर रहे हैं, ने कहा, "चिलर किसी दूध उत्पादक के लिए सबसे सस्ता बीमा है। ठंडा दूध अपनी गुणवत्ता बनाए रखता है, किसान का पैसा बचता है और बिजली का बिल सूरज भरता है।"
दो साल में क्या बदला
| विवरण | दो साल पहले | अब |
|---|---|---|
| रोज़ का संग्रह (लीटर) | 9,000 | 18,000 |
| सदस्य | 2,300 | 3,400 |
| महिला सदस्यों का हिस्सा | 38% | 61% |
| गुणवत्ता के कारण लौटाया गया दूध | करीब 6% | 1% से कम |
भुगतान हर दस दिन में सीधे सदस्यों के बैंक खाते में जाता है। सुरेश मोदी कहते हैं कि महिलाओं के ज़्यादा जुड़ने की यही बड़ी वजह है: समिति उसी को भुगतान करती है जिसके नाम पर पशु दर्ज है, और कई परिवारों ने पशु महिला के नाम पर दर्ज कराए।
समिति अब पनीर और घी बनाने का एक छोटा प्लांट लगाना चाहती है, ताकि सर्दियों में ज़्यादा दूध आने पर बेहतर कमाई हो। समिति ने दो पशु चिकित्सकों के साथ एक हेल्पलाइन भी शुरू की है।













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