घरेलू स्मार्टफ़ोन ब्रांड तरंग मोबाइल ने शुक्रवार को लखनऊ के पास अपना पहला असेंबली प्लांट शुरू किया। कंपनी का कहना है कि एक साल में चारों प्रोडक्शन लाइनें चालू होने पर यहां 1,800 लोगों को रोज़गार मिलेगा।
प्लांट में कंपनी के सस्ते और मध्यम दाम वाले फ़ोन असेंबल होंगे। शुरुआती क्षमता हर महीने करीब डेढ़ लाख फ़ोन की है। कंपनी ने बताया कि चार्जर, कवर और पैकिंग का सामान इलाक़े के छोटे सप्लायरों से लिया जाएगा।
तरंग के प्रबंध निदेशक विवेक सूद ने कहा, "हम चाहते हैं कि फ़ोन और डिब्बे में आने वाला ज़्यादातर सामान इस प्लांट से कुछ घंटों की दूरी के भीतर बने। इससे लागत घटती है और सप्लायर वाले कस्बों में भी काम बढ़ता है।"
किसकी भर्ती हो रही है
- पहले 600 कर्मचारियों में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, ज़्यादातर आसपास के ज़िलों से।
- नए कर्मचारियों को असेंबली और टेस्टिंग की आठ हफ़्ते की सवेतन ट्रेनिंग मिलती है।
- कंपनी तीन कस्बों से बसें चलाती है और दूर से आने वालों के लिए हॉस्टल है।
- छोटे बच्चों वाले कर्मचारियों के लिए अगले महीने परिसर में क्रेच खुलेगा।
उद्योग के जानकारों का कहना है कि असेंबली प्लांट नौकरियां तो बहुत देते हैं, लेकिन जब तक ज़्यादा पुर्ज़े देश में न बनें, तब तक मूल्यवर्धन सीमित रहता है। तरंग का कहना है कि वह तीन साल के भीतर इलाक़े में सर्किट बोर्ड बनाने के लिए दो कंपनियों से बात कर रही है।
स्थानीय अधिकारियों ने प्लांट का स्वागत किया, जबकि कामगारों के अधिकारों पर काम करने वाले एक समूह ने कंपनी से ठेकेदारों के ज़रिए काम करने वाले सभी कर्मचारियों की मज़दूरी दर और शिफ़्ट के नियम सार्वजनिक करने की मांग की।







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