गणेशोत्सव के बाद वरुणपुर के समुद्र तट पर रविवार सुबह 600 से ज़्यादा स्वयंसेवक जुटे और छह घंटे में करीब आठ टन कचरा हटाया। इनमें स्कूली बच्चे, कॉलेज छात्र, मछुआरा परिवार और पर्यटन व्यवसायी शामिल थे।
विसर्जन के बाद तट पर फूल-मालाएं, प्लास्टिक की थैलियां, थर्मोकोल और सजावट का सामान बिखरा था। स्वयंसेवकों ने कचरे को तीन हिस्सों में बांटा: फूल और जैविक कचरा, प्लास्टिक, और बाक़ी सामान।
आयोजन करने वाले युवा मंडल के सचिव अमोल तांडेल ने बताया, "फूलों से खाद बनाने के लिए पास के कृषि केंद्र से बात हुई है। प्लास्टिक रीसाइक्लिंग वालों को दिया गया है। हमारी कोशिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा सामान फिर से काम आए।"
अगले साल के लिए सुझाव
- पंडालों से मिट्टी की मूर्तियों और प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल की अपील।
- विसर्जन स्थल पर फूल और प्लास्टिक के लिए अलग-अलग पात्र।
- मंडलों के बीच "सबसे साफ़ विसर्जन" प्रतियोगिता।
- कृत्रिम तालाबों में विसर्जन की व्यवस्था बढ़ाना।
मछुआरा समाज के बुज़ुर्ग नारायण कोळी ने कहा कि तट साफ़ रहेगा तो मछलियां भी लौटेंगी और पर्यटक भी। "समुद्र हमें रोज़ी देता है। एक दिन हम उसे कुछ लौटा दें, इतना तो बनता है।"
नगर परिषद ने मंडल के सुझावों पर अगले महीने गणेश मंडलों के साथ बैठक बुलाई है।








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