पैसे से जुड़ी आदतें बचपन में ही बनती हैं। वित्तीय सलाहकार मानते हैं कि जो बच्चे छोटी उम्र में बचत और ख़र्च में फ़र्क़ समझते हैं, वे बड़े होकर क़र्ज़ और ख़र्च को बेहतर संभालते हैं।
पांच आसान तरीक़े
- तीन डिब्बे बनाएं। एक ख़र्च के लिए, एक बचत के लिए और एक दूसरों की मदद के लिए। जेब ख़र्च तीनों में बांटना सिखाएं।
- छोटा लक्ष्य तय करें। कोई किताब, खिलौना या साइकिल की घंटी। लक्ष्य की तस्वीर गुल्लक पर चिपकाएं।
- इंतज़ार करना सिखाएं। हर चीज़ तुरंत न दिलाएं। बचत से ख़रीदी चीज़ की क़ीमत बच्चे को ज़्यादा समझ आती है।
- बाज़ार में साथ ले जाएं। दाम की तुलना करना, बिल देखना और बचे पैसे गिनना खेल-खेल में सिखाएं।
- बैंक खाता खुलवाएं। थोड़ा बड़ा होने पर बच्चे के नाम खाता खुलवाएं और पासबुक में बढ़ती रक़म दिखाएं।
माता-पिता क्या ध्यान रखें
बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं। घर में ख़र्च पर खुलकर बात करें, लेकिन पैसे को डर या झगड़े का विषय न बनाएं। ग़लती होने दें; अगर बच्चा सारा पैसा एक बार में ख़र्च कर दे, तो अगली बार वह ख़ुद सोचेगा।
स्कूलों में वित्तीय साक्षरता पर काम करने वाली शिक्षिका अनुराधा सिंह कहती हैं, "बच्चे को यह समझाना ज़रूरी है कि पैसा मेहनत से आता है और सोच-समझकर ख़र्च होता है। यह बात भाषण से नहीं, रोज़ के छोटे फ़ैसलों से सिखाई जाती है।"








टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ